pdf me password kaise dale | How to add password to PDF in Mobile

pdf me password kaise dale | How to add password to PDF in Mobile

PDF me password kaise dale | How to add password to PDF in Mobile

PDF एक Document File का Format होता है। जब भी हम इंटरनेट से कोई सार्टिफिकेट डाउनलोड करते हैं तो हमें यह pdf format में मिलती है। जैसे कि आधार कार्ड, पैन कार्ड या फिर Vaccination Certificate download करते हैं तो वो भी हमें pdf के रूप में मिलती है। और इनमें से कुछ pdf file में password भी लगा होता है। अगर आप जानना चाहते हैं कि अपने किसी भी pdf में पासवर्ड कैसे लगाए मोबाइल से, तो इस पोस्ट में मैं बताने वाला हूँ pdf me password kaise dale या How to add password to PDF in Mobile लेकिन इससे पहले अगर आप नही जानते कि Mobile se pdf kaise banate hain तो यह पोस्ट जरूर पढ़े।


PDF में पासवर्ड लगाने से क्या होता है?

जैसा कि आप के मोबाइल पर आपकी निजी जानकारी जैसे मार्कशीट, बैंक पासबुक, आधार कार्ड, पैन कार्ड या फिर कुछ और है तो आप इसका pdf बना कर इसमें password set कर सकते हैं। इससे होगा ये कि कोई भी यदि आप की मोबाइल को लेता है तो आप की निजी जानकारी को नही देख पाएगा। और आपकी निजी जानकारी का गलत उपयोग नही कर पाएगा। इसलिए आपको पासवर्ड जरूर लगाना चाहिए। तो चलिए अब जानते हैं How to create password protected pdf in mobile.


PDF me password kaise dale - How to add password to PDF in Mobile

किसी भी pdf में password लगाने के लिए आपको मोबाइल पर एक pdf tool install करना होगा। जिसका नाम है Ishan pdf Manager इसे आप प्लेस्टोर से बिल्कुल फ्री में डाउलोड कर सकते हैं। या फिर इसी लिंक पर क्लिक कर सीधे डाउनलोड कर सकते हैं।

आप इस App से कई काम कर सकते हैं जैसे कि pdf में पासवर्ड लगा सकते हैं, पहले से लगे हुए पासवर्ड को रिमूव भी कर सकते हैं। pdf को image में औऱ image या text को pdf में कन्वर्ट कर सकते हैं, पीडीएफ की साइज को compress करके साइज कम कर सकते हैं। तथा और भी बहुत कुछ एक ही ऐप से कर पाएगे।


इस app को डाउनलोड करने के बाद ओपन कीजिए और open करने पर कुछ इस तरह का पेज ओपेन होगा। यहाँ पर आपको थोड़ा सा नीचे आना है और Add password पर क्लिक करना है।

pdf me password kaise dale | How to add password to PDF in Mobile
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अब यहाँ पर आपोक 3 Option दिखाई देगें

SELECT A FILE

CREATE FDF

View Files

Select pdf file for add password, pdf me password kaise dale
Select pdf file for add password


तो अपने pdf को सेलेक्ट करने के लिए SELECT A FILE पर क्लिक करें और पीडीएफ फाइल को सेलेक्ट करें या फिर View Files पर क्लिक करके अपनी सभी pdf file को एक साथ ही देखे और यहाँ से सेलेक्ट कर लें जिस pdf में आपको पासवर्ड डालना।

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इसके बाद CREATE PDF पर क्लिक कीजिए फिर एक Password enter कीजिए और OK कर दीजिए। आपकी नई Password Protected pdf create हो जाएगी। अब पुरानी pdf file डिलीट कर दीजिए और इस नई पासवर्ड वाली pdf को रख लीजिए।


PDF का पासवर्ड कैसे हटाए - PDF ka password kaise hataye

यदि आप इस पासवर्ड को Remove करना चाहते हैं तो, आपको Remove password के ऑप्शन को सेलेक्ट कर के उस पासवर्ड वाली pdf file को सेलेक्ट करना है। और अपना पुराना पासवर्ड डालकर OK कर देना है। Password remove हो जाएगा।


निष्कर्ष

उपर बताए गए ऐप के माध्यम से आप अपने PDF me password dal सकते हैं, और अपनी निजी जानकारी को सिक्योर कर सकते हैं। इसके साथ ही आप pdf को इमेज में convert कर सकते हैं। और इमेज या टेक्स्ट को pdf में बदल सकते हैं। इसके साथ ही आप pdf file को Compress, Merge और Split इत्यादि कर सकते हैं।

नमस्कार दोस्तों मेरा नाम रोहित सोनी है, और मैं TechnicalRpost.in का Admin and Author हूँ। उम्मीद करता हूँ कि यह पोस्ट PDF me password kaise dale | How to add password to PDF in Mobile हेल्पफुल रही होगी। धन्यवाद!


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 कैंसिल चेक क्या हैं कैसे बनाएं? Cancelled Cheque Meaning in Hindi

कैंसिल चेक क्या हैं कैसे बनाएं? Cancelled Cheque Meaning in Hindi

 कैंसिल चेक क्या हैं कैसे बनाएं? Cancelled Cheque Meaning in Hindi

दोस्तों कई जगहों पर कैंसिल चेक मांगा जाता है जैसे कि यदि बैंक से लोन लेना हो या फिर कही Invest करना हो तो Cancelled cheque मागा जाता है। परन्तु क्या आप जानते हैं कैंसिल चेक किसे कहते हैं और कैंसिल चेक कैसे बनाएं जाते हैं? कैंसिल चेक बनाते समय किन बातों का ध्यान रखना जरूरी होता है क्योंकि थोड़ी सी भी गलती के कारण आपके साथ बहुत बड़ा फ्राड हो सकता है। पिछले पोस्ट में हमने बताया था बैंक से पैसे निकाने का फॉर्म या पर्ची कैसे भरते हैं? इस आर्टिकल में हम जानेंगे कैंसिल चेक क्या है? और कैसिल चेक कैसे बनाते हैं? Cancelled cheque meaning in hindi.


    कैंसिल चेक किसे कहते है - Cancelled cheque meaning in hindi

    कैंसल चेक अलग से नही आता है, बल्कि नार्मल चेक बुक से ही बनाया जाता है। कैंसल चेक खाली चेक होता है जिसमें हमें पेन से दो सामान्तर लाइन खीच कर उसके बीच में CANCELLED लिखना होता है। Cancelled cheque का meaning यही होता है रद्द (cancel) किया हुआ cheque जिससे किसी भी तरह के ट्रांजेक्शन नही किया जा सकता है। अब सवाल यह है कि तो फिर कैंसल चेक क्यो मांगा जाता है?


    कैंसिल चेक क्यो मागा जाता है? और कहां-कहां कैसिल चेक लगता है?

    Cancelled cheque आपसे इसलिए मागा जाता है ताकि आपके बैंक अकाउंट की जानकारी को वेरीफाइ किया जा सके। कैंसिल चेक लेने का मेन उद्देश्य यही होता है आपकी बैंक अकाउंट की डिटेल को लेना। और यह वेरीफाई करना की इस बैंक में आपका अकाउंट खुला हुआ है।


    कहां-कहां पर कैंसल चेक लगता है?

    कैंसिल चेक का उपयोग मुख्य रूप से इन जगहों पर किया जाता है –

    • Cancelled cheque का उपयोग केवाईसी डॉक्यूमेंट के तौर पर किया जाता है। यहाँ पर ग्राहक की पहचान (As a KYC document) कन्फर्म करने वाले दस्तावेजो के रूप में किया जा सकता है। जैसे – market-linked instruments यानी Mutual fund, Stocks आदि में।

    • लोन की ईएमआई (Loan EMIs) या किसी किस्तों के लिए Cancelled cheque लगता है। जैसे होम लोन, कार लोन, एजुकेशन लोन या अन्य Loans को बैंक देने से पहले आपसे कैंसिल चेक जमा करवा लिया जाता है।

    • ईपीएफ (EPF) के लिए कैंसिल चेक मागा जाता है। ऐसे कर्मचारी जिनका पैसा कटकर रिटायरमेंट फंड में जमा होता है। और फिर जब यह पैसा निकालना होता है तो कर्मचारी को आवेदन फॉर्म के साथ cancelled cheque भी देना होता है।

    • ECS (Electronic clearance service) जैसी सुविधा में कैंसिल चेक की जरूरत होती है। जैसे म्युचुअल फंड में किस्त हर महीने आपके अकाउंट से काटने की सुविधा के लिए cancelled cheque को जमा कराया जाता है।

    • इसी प्रकार डीमैट अकाउंट खुलवाने पर या कोई पॉलिसी बांड खरीदते समय आपको Cancelled चेक की जरूरत पड़ती है।

    कैंसिल चेक कैसे बनाएं – How to make cancelled cheque in hindi

    Cancelled cheque क्या है? कैंसिल चेक कैसे बनाएं, Cancelled cheque meaning in hindi
    Cancelled cheque क्या है? कैंसिल चेक कैसे बनाएं


    Cancelled cheque बनाना बहुत सरल है आपको बैंक से मिला हुआ चेकबुक से एक चेक निकालना है और फोटो में दिखाए अनुसार आपको भी चेकबुक पर 2 तिरक्षी समान रेखाएं खीचना और उसके बीच में CANCELLED लिख देना है। इसके अलावा और कुछ भी नही लिखना है। और ना ही हस्ताक्षर करना है। इस प्रकार से आपका कैंसिल चेक बनकर तैयार है। किसी को भी देने के लिए।


    कैंसिल चेक के नियम क्या है? कैंसिल चेक बनाते समय ध्यान रखे ये बाते

    Cancelled cheque बनाने से पहले आपको इन बातों का विशेष ध्यान देना चाहिए।

    • Cancelled cheque में या किसी भी प्रकार के चेक को भरने के लिए नीला व काला पेन का ही इस्तेमाल करें।

    • कैंसिल चेक पर आपको कहीं पर भी हस्ताक्षर नही करना चाहिए क्योंकि इससे स्कैम हो सकते हैं। कई ऐसे केस सामने आएं है कि कैंसल चेक की फोटो कॉपी निकाल कर आपके अकाउंट से पैसे भी निकाल लिए जाते हैं।

    • आपको कैंसिल चेक में दो तिरछी समान लाइन खीचना है और बीच में CANCELLED के अलावा कुछ भी और नही लिखना है।

    • जिसे आप कैंसिल चेक दे रहे हैं उनसे एक बार कंफर्म कर ले कि स्कैन कॉपी Accept कर रहे है या नही। यदि स्कैन कॉपी Accept करते हैं तो आप उन्हे स्कैन कॉपी ही दे जिससे आपके एक ही कैंसिल चेक से कई बार काम लिया जा सके।


    तो दोस्तों ये थी जानकारी कैंसिल चेक क्या हैं? और आपने इस पोस्ट में जाना cancelled cheque meaning in hindi, कैंसिल चेक कैसे बनाए जाते हैं, और कैंसिल चेक कहाँ कहाँ पर लगता है? उम्मीद करता हूँ यह पोस्ट आपके लिए हेल्पफुल रही होगी। 


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     Sbi बैंक में पैसे जमा करने का फॉर्म कैसे भरें | sbi bank mein paise jama karne ka form kaise bhare

    बैंक में पैसे जमा करने के लिए आपको खाता जमा पर्ची (PAY IN SLIP) भरना होता है। लेकिन जब आप पहली बार भरते हैं तो आपको डर रहता है कि कही कुछ गलत न हो जाए। क्योंकि थोड़ी सी गलती के कारण आपकी पर्ची रिजेक्ट हो जाती है। इसलिए आपको ध्यान से खाता जमा पर्ची भरना चाहिए।


    Pay in slip meaning in hindi – खाता जमा पर्ची क्या है?

    Pay in slip का हिन्दी meaning है खाता जमा पर्ची। इसे और भी नाम से जाना जाता है जैसे वाउचर, SBI Deposit Slip या पैसे जमा करने का फॉर्म। आप इस फॉर्म से अपने बैंक अकाउंट में पैसे जमा कराते हैं। इस पोस्ट में हम एसबीआई डिपाजिट स्लिप कैसे भरें (sbi bank mein paise jama karne ka form kaise bhare) इसके बारे जानकारी देंगे। यदि आप SBI Withdrawal Form Kaise Bhare जानना चाहते हैं तो हमारी पिछली पोस्ट देंखें।


    SBI bank mein paise jama karne ka form kaise bhare - स्टेट बैंक ऑफ इंडिया बैंक में पैसे जमा करने का फॉर्म कैसे भरें?

    Sbi deposit slip में आपको दो पार्ट देखने को मिलता जिसमें से राइड साइड वाला पार्ट बैंक के लिए होता है और लेफ्ट वाला जो छोटा सा होता है वह आपको रसीद के तौर पर वापस दिया जाता है।


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    sbi bank mein paise jama karne ka form kaise bhare


    SBI बैंक में पैसे जमा करने कि पर्ची (Slip) किस तरह से भरते हैं आगे उसका तरीका बता रहे हैं-

    यहाँ पर फोटो में देख सकते हैं हमने इसमें नंबरिंग दे दिया है जिसकी डिटेल आगे है,


    1. शाखा वाले जगह पर आप अपने बैंक के ब्रांच का नाम लिखना है।

    2. A/c No. में आपको दोनो तरफ अपना अकाउंट नंबर डालना है।

    3. Date में आपको उस दिन का दिनांक डालेगे जिस दिन पैसे जमा कर रहे हैं।

    4. अब इस जगह पर अपना नाम लिखना है जैसा पासबुक में लिखा होगा।

    5. इस जगह पर आपको अपने नोटो की डिटेल देनी होती है जैसे 5000 जमा कर रहे हैं तो आपके पास कितने 500 के नोट है और कितने 100, 200, 50 की नोट है यहाँ पर भरें और नीचे Total Rs. में 5000 (जितनी जमा कर रहे हैं वह अमाउंट) लिखिए।

    6. यहाँ पर भी 5000 लिख दीजिए और

    7. नंबर में वही अमाउंट शब्दों में लिख दीजिए।

    8. जमाकर्ता के हस्ताक्षर पर अपना Signature करिए।

    9. लास्ट में अपना नाम पता, मोबाइल नंबर डाल दीजिए।


    इस प्रकार से आपको Sbi बैंक में पैसे जमा करने का फॉर्म भरना है और पैसे के साथ ले जाकर काउंटर पर जमा कर देना है। आपका पैसा जमा कर दिया जाएगा। और पर्ची (Slip) कट करके आपको साबूत के तौर पर दे दिया जाएगा। उम्मीद है कि यह पोस्ट SBI bank mein paise jama karne ka form kaise bhare - स्टेट बैंक ऑफ इंडिया बैंक में पैसे जमा करने का फॉर्म कैसे भरें? पसंद आई होगी।


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     State bank of India से पैसे निकालने का फॉर्म कैसे भरें?

    बैंक से पैसे निकालने के लिए आप के पास वैसे तो चेक (Cheque) के अलावा और ऑप्शन भी होते हैं, जैसे आप ATM से भी पैसा निकाल सकते हैं। लेकिन इसमें कुछ लिमिट होती है या फिर आप के पास ATM Card नही है। तो बैंक से पैसे निकालने के लिए आपको चेक भरना होता है। परन्तु यदि आप पहली बार बैंक से पैसे निकालने का फॉर्म भरते है तो जरा सी गलती के कारण आपको चेक (Cheque) फाड़ना पड़ सकता है। इसलिए पहले आपको अच्छे से जान लेना चाहिए कि State bank of india ka cheque kaise bhare तो Sbi बैंक से पैसे निकालने का फॉर्म कैसे भरें? क्या क्या भरना जरूरी होता है चलिए जानते हैं-


    State bank of india ka cheque kaise bhare - Sbi बैंक से पैसे निकालने का फॉर्म कैसे भरें?

    SBI बैंक से पैसे निकालने के लिए आपको चेक को इस प्रकार से भरना चाहिए- 

    State bank of india ka cheque kaise bhare, Sbi बैंक से पैसे निकालने का फॉर्म कैसे भरें?
    Sbi बैंक से पैसे निकालने का फॉर्म कैसे भरें?


    1) खाताधरक का नाम (Name of the Account Holders) :- यहा पर आपको उस व्यक्ति का नाम लिखना है जिसके अकाउंट से पैसा निकालना है चलिए मान लेते है कि आप अपने ही अकाउंट से पैसे निकालने वाले हैं। यहाँ पर अपना नाम लिखिए जैसा की आपके पासबुक में लिखा हुआ है।

    2) शाखा/BRANCH:- यहाँ पर आपको बैंक की शाखा जहाँ पर वहाँ का नाम डालना है।

    3) दिनांक:- जिस Date को आप पैसा निकाल रहे हैं वह दिनांक यहाँ पर भरें।

    4) खाता संख्या (ACCOUNT NUMBER):- इसके नीचे बने खाचे में आपको अपना Account Number भरना है।

    5) इसके बाद आपको और नीचे अमाउंट डालना है जितना आप पैसा निकालना चाहते है। पहले अंको में लिखना है (जैसे 5000/) और उसके आगे के खाचे में शब्दों में (पाँच हजार मात्र) लिखना है। और ध्यान रहे दोनो में सेम अमाउंट होनी चाहिए।

    6) फोन/मोबाइल नं. :- यहाँ पर आप अपना मोबाइल नं. डाल दीजिए।

    7) खाताधरक के हस्ताक्षर Signatures of the Account Holders:- यहाँ पर आपको अपना हस्ताक्षर (Signature) करना है जैसा आप खाता खुलाते समय फॉर्म में किया था। इसके अलावा 2 हस्ताक्षर आपको cash withdraw form के पीछे भी कर सकते है आप नही भी करेंगे तो भी चल जाएगा। अंगूठा लगाने वाले यहाँ पर अपना अंगूठा लगाएंगे।

    बस आपको केवल इतना ही डिटेल भरना है और इस फॉर्म को पासबुक के साथ काउंटर पर ले जाकर जमा करना है। आपको पैसे दे दिया जाएगा।

    तो देखा आपने कि SBI बैंक से पैसे निकालने का फॉर्म भरना कितना आसान है। दोस्तों लगभग सभी बैंकों का cash withdraw form सेम ही रहता है। आपको यही सारी बेसिक डिटेल फिल करनी होती है। और इसे काउंटर पर जमा करना है। 


    नोट – यहाँ पर जो आप फॉर्म भर रहें है इसके साथ आपको अपना पास बुक भी जमा करना होगा और फिर पैसे के साथ आपको पासबुक लौटा दिया जाता है।


    Conclusion– आज के इस post में आपने सीखा State bank of india ka cheque kaise bhare या Sbi बैंक से पैसे निकालने का फॉर्म कैसे भरें?  उम्मीद है कि यह जानकारी आपके लिए उपयोगी होगी। इसे अपने दोस्तों के साथ शेयर जरूर करें।


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    इस आर्टिकल में कंप्यूटर की जनरेशन की विस्तार से जानकारी दी गयी है। कंप्यूटर की जनरेशन क्या है? कंप्यूटर को कितनी जनरेशन में वर्गीकृति किया गया है।

      कंप्यूटर जनरेशन क्या है? कंप्यूटर की सभी पीढ़ियों की व्याख्या करें– Computer ki Generation se kya matlab hota hai?

      जैसा की आप को पता होगा की वर्तमान समय में जिस प्रकार के कंप्यूटर देखने को मिलते हैं, शुरुआती दौर पर ऐसे बिल्कुल भी नही थे। शुरुआती दौर में कंप्यूटर काफी बड़े और बहुत ही काम्प्लीकेटेड हुआ करते थे। फिर उनमें कई सारे बदलाव किए गये उनमें नए-नए फीचर ऐड होते चले गए। जिसकी बजह से आज के कंप्यूटर हमारे जेब तक में रखने लायक हुए।


      कंप्यूटर की इन्ही विकास के चरणों को कंप्यूटर जनरेशन के नाम से जाना जाता है। कंप्यूटर की जनरेशन का अर्थ होता है कंप्यूटर की पीढ़ी। 


      How Many Computer Generation in Hindi - कंप्यूटर की जनरेशन को विस्तार से समझाइए?

      How Many Computer Generation in hindi - कंप्यूटर की जनरेशन को विस्तार से समझाइए?
      How Many Computer Generation in hindi


      कंप्यूटर को विकास के आधार पर 5 पीढ़ियों में वर्गीकृत किया गया है जिनके बारे में आगे विस्तार से बताया गया है।

      1. पहली पीढ़ी (First Generation)  – 1946 से 1956
      2. दूसरी पीढ़ी (Second Generation) – 1956 से 1964
      3. तीसरी पीढ़ी (Third Generation) – 1964 से 1971
      4. चौथी पीढ़ी (Forth Generation) – 1971 से 1980
      5. पाँचवीं पीढ़ी (Fifth Generation) – वर्तमान और भविष्य

      Computer 1st Generation – फस्ट जनरेशन के कंप्यूटर (1946 से 195)

      सन् 1946 में एकर्ट और मुचली के द्वारा एनिएक (ENIAC) नामक कम्प्यूटर किया गया था जिसेसे कंप्यूटर की प्रथम पीढ़ी का प्रारंम्भ हो गया। पहली पीढ़ी के कंप्यूटरो में वैक्यूम ट्यूब (Vacuum tube) प्रयोग किया गया था जिसका आविष्कार सन् 1904 में ही हो चुका था। इस पीढ़ी के कंप्यूटरों में स्विचिंग के लिए वैक्यूम ट्यूब का इस्तेमाल किया गया तथा इनपुट के लिए पंचकार्ड और साथ ही स्टोरेज के लिए मैग्नेटिक ड्रम का उपयोग किया जाता था।


      Computer 1st generation vaccum tube
      Vaccum Tube


      प्रथम पीढ़ी के कंप्यूटरो का आकार काफी बड़ा था लगभग एक बड़े कमरे की पूरी जगह में एसेम्बल किया जाता था। और इन्हे चलाने के लिए इतनी बिजली खर्च होती थी जितनी किसी कारखाने को चलाने में होती है। साथ ही काफी स्लो चलते थे। चूकि इसमें वैक्यूम ट्यूब का इस्तेमाल किया गया था जिसके कारण से हीटिंग की बहुत बड़ी समस्या बनी रहती थी जिसके लिए कई सारे एयर कंडीसनर का प्रयोग किया जाता था।

      तथा जल्दी ही गरम होकर वैक्यूम ट्यूब भी खराब हो जाते थे जिन्हे समय-समय पर बदलना पड़ता था।

      प्रथम पीढ़ी में कई कंप्यूटर विकसित हुए जैसे – 

      EDSAC – Electronic Delay Storage Automatic Calculator

      EDVAC – Electronic Discrete Variable Automatic Computer

      UNIVAC – Universal Automatic Computer

      UNIVAC – 1


      फस्ट जनरेशन के कंप्यूटर की विशेषताए क्या थी?

      • वैक्यूम ट्यूब से चलते थे।
      • इनपुट के लिए पंचकार्ड का प्रयोग होता था।
      • स्टोरेज के लिए मैग्नेटिक ड्रम का इस्तेमाल।
      • ये कंप्यूटर बहुत ही नाजुक और कम विश्वसनीय थे।
      • कंप्यूटर को ठंडा करने के लिए बहुत सारे एयर कंडीशनरों का प्रयोग होता था जिससे बिजली की खपत बहुत ज्यादा होती थी।
      • मशीनी तथा असेम्बली भाषा में प्रोग्रामिंग।


      Computer 2nd Generation - सेकंड जनरेशन के कंप्यूटर (1956 से 1964)

      सेकंड जनरेशन के कंप्यूटर की शुरुआत तब हुई जब वैक्यूम ट्यूब की जगह ट्रांजिस्टर का इस्तेमाल होने लगा। ट्रांजिस्टर का आविष्कार विलियम शॉकले (William Shockley) ने 1947 में किया था। ये ट्रांजिस्टर वैक्यूम ट्यूब की तुलना में कई गुना बेहतर थे क्योकि ये बहुत फास्ट होने के साथ ही कम बिजली खर्च करते थे जिससे कंप्यूटर को चलाना कुछ हद तक सस्ता हो गया लेकिन Heat की समस्या अब भी बनी थी।


      Computer second generation transistors
      Transistors


      इस पीढ़ी के कंप्यूटर मशीनी भाषा की जगह Assembly language का इस्तेमाल करते थे। इसमें COBOL और FORTRAN उच्च स्तरीय भाषा का इस्तेमाल किया गया।


      सेकंड जनरेशन के कंप्यूटर की विशेषता क्या थी?

      • Vacuum tube के स्थान पर Transistor का उपयोग।
      • आकार में कुछ छोटे हुए तथा बिजली की कम खपत।
      • प्रथम पीढ़ी से काफी स्पीड और अधिक विश्वसनीय हो गए।
      • अपक्षाकृति कम खर्चीले थे।
      • स्टोरेज डिवाइस, प्रिंटर एवं ऑपरेटिंग सिस्टम का प्रयोग हुआ।
      • COBOL एवं FORTRAN जैसी हाई लेवल लैंगवेज प्रोग्रामिंग भाषा का प्रयोग।


      Computer 3rd Generation – तीसरी जनरेशन के कंप्यूटर (1964 से 1971)

      तीसरी पीढ़ी के कंप्यूटरो में IC (Integrated Circuits) ने ट्रांजिस्टर्स की जगह ले लिया। अब ट्रांजिस्टर को काफी छोटे कर के एक सिलिकॉन चिप्स के अंदर डाला गया जिसे सेमीकंडक्टर कहा गया। IC का आविष्कार Texas Instrument Company के अभियंता जैक किल्बी ने किया था। इस पीढ़ी में heat की समस्या काफी हद तक कम हो चुकी थी लेकिन इसे एक अनुकूलित वातावरण की आवश्यकता थी।


      आई.सी ने speed and efficiency काफी ज्यादा बढ़ा दी थी। अब पंच कार्ड और प्रिंटऑउट की जगह तीसरी पीढ़ी में कीबोर्ड और मॉनीटर का इस्तेमाल शुरू हो गया। जिसके लिए ऑपरेटिंग सिस्टम का प्रयोग किया गया। इस पीढ़ी के कंप्यूटर में मुख्यरूप से ICL 2903, ICL 1900, UNIVAC 1108 और System 1360 आदि थे।


      तीसरी पीढ़ी के कंप्यूटर की विशेषता क्या है?

      • IC का प्रयोग हुआ जिससे कंप्यूटर की क्षमता में कई गुना बढ़ोत्तरी हुई।
      • 1st व 2nd जनरेशन की अपेक्षा आकार एवं बजन में बहुत कम होत गए।
      • और अधिक विश्वसनीय हो गए।
      • पोर्टेबल हो गए और रख-रखाव मे कम खर्चा।
      • हाई लेवल लैग्वेज का प्रयोग किया गया।


      Computer 4th Generation – चौथी पीढ़ी के कंप्यूटर (1971 से 1980 तक)

      चौथी पीढ़ी में माइक्रो प्रोसेसर का इस्तेमाल किया गया। इसमें हजारों IC को एक सिलिकॉन चिप के अंदर ही फिट किया गया। जिसे LIC (Large Integrated Circuit) कहा जाता है। अब लगभग 300000 ट्रांजिस्टरों के बराबर का सर्किट को एक इंच के चौथाई भाग में लगाया जा सकता था।  इस आविष्कार से पूरी Central Processing Unit (CPU) एक छोटी सी चिप के अंदर आ गयी जिसे Micro Processor कहा जाता है। अब इसके प्रयोग से कंप्यूटर साइज में इतने छोटे हो गए थे की इसे हथेली पर रख सकते थे।


      computer fourth generation Microprocessor
      Microprocessor


      1971 में Intel 4004 chip को Develop किया गया जिसके अंदर ही सारे कंपोनेंट को फिक्स कर दिया गया। सन् 1981 में IBM ने पहली बार घर पर इस्तेमाल होने वाला पहला कंप्यूटर सिस्टम तैयार किया।


      ALTAIR 8800 सबसे पहला माइक्रो कंप्यूटर था जिसे मिट्स (MITS) नाम की कंपनी ने बनाय था। इसी कंप्यूटर पर बिल गेटस (Bill Gates) ने Basic Language को इंस्टॉल किया था। इसमें सफलता प्राप्त करने के बाद बिल गेटस ने माइक्रोसॉफ्ट कंपनी की स्थापना की जो दुनिया की सबसे बड़ी Software कंपनी है।


      चौथी पीढ़ी के कम्प्यूटरों की विशेषता क्या है?

      • LSI और VLSI टेक्निक का इस्तेमाल किया गया।
      • कंप्यूटरों में Micro Processor के उपयोग से आकार में अद्भुत कमी आ गई।
      • आम लोगों के खरीदने योग्य हो गया क्योंकि लागत में कमी आ गई और रख-रखाव का खर्चा न के बराबर।
      • स्पीड, विश्वसनीयता में काफी ज्यादा बढ़ोत्तरी हुई व साथ ही और अधिक प्रभावी हो गया।
      • इन कंप्यूटरो की मेमोरी क्षमता में काफी विकास हुआ।
      • इस जनरेशन में कई प्रकार के नेटवर्क का भी विकास हुआ।


      Computer 5th Generation – फिफ्त जनरेशन के कंप्यूटर (वर्तमान से भविष्य)

      इस पीढ़ी के कंप्यूटर में वर्तमान की तकनीक और भविष्य में आने वाले टेक्नोलॉजी को सामिल किया गया है। पाँचवीं पीढ़ी के कंप्यूटरों में Artificial intelligence को बढ़ावा दिया गया है, जैसे Voice recognition, Quantum calculation, parallel processing आदि। इस पीढ़ी के कंप्यूटर काफी advance हो चुके हैं। 


      Computer 5th generation artificial intelligence
      Artificial intelligence


      इस पीढ़ी के कंप्यूटरों में Very Large Scale Integrated Circuit की जगह Ultra Large Scale Integrated Circuit का इस्तेमाल किया जाने लगा। जिससे डाटा और सूचना को आपस में शेयरिंग तथा आदान-प्रदान संभव हो गया। और साथ ही कंप्यूटर के आकार को भी बहुत ज्यादा कम करने का प्रयास किया गया। जिसका परिणाम आज हम एक कंप्यूटर को अपनी कलाई में घड़ी के जैसे पहन भी सकते हैं।


      इस जनरेशन के कंप्यूटर इतने ज्यादा विकसित हो चुके है कि वे हर विशिष्ट क्षेत्र जैसे – अकाउंटिंग, इंजीनियरिंग, चिकित्सा, भवन निर्माण, अंतरिक्ष व अन्य दूसरे रिसर्च में उपयोग होने लगा।


      पांचवी पीढ़ी के कंप्यूटर की विशेषताएं

      • VLSIC की जगह ULSIC का इस्तेमाल किया गया जिससे कंप्यूटरों के आकार में कई प्रकार के अंतर देखने को मिले। जैसे Desk Top, Lap Top, Palm Top आदि।

      • इस पीढ़ी में इंटरनेट का बहुत बड़ा योगदान रहा है अब कंप्यूटर दुनिया भर के कंप्यूटरों से कनेक्ट हो गए और इस तरह से हम घर बैठे ही कहीं भी Document, Information, Files, कुछ भी भेज तथा प्राप्त कर सकते हैं।

      • इंटरनेट से किसी भी प्रकार की जानकारी सर्च कर सकते हैं।
      • नए-नए प्रकार के Application अत्यधिक विकसित होने लगे किसी स्पेसिक कार्य के लिए एक सॉफ्टवेयर का डेवलप किया जाने लगा।

      • इस पीढ़ी में मल्टीमीडिया जैसे – Sound, Video (Graphics), Image, और Text का जमकर विकास हुआ जिससे कंप्यूटर की दुनिया में एक क्रांति पैदा हुई।

      • पाँचवीं पीढ़ी के कंप्यूटर की मुख्य विशेषता Artificial Intelligence है। अब कंप्यूटर Face Recognition, Sound Recognition, जैसे टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल होने लगा।


      FAQ Related to generation of computer

      Q. प्रथम पीढ़ी के कंप्यूटर का आविष्कार कब हुआ था?

      Ans. सन् 1946 में।

      Q. प्रथम पीढ़ी के कंप्यूटर में किसका यूज किया गया?

      Ans. वैक्यूम ट्यूब (Vacuum Tube) का।

      Q. सेकंड जनेरेशन के कंप्यूटर में किसका यूज किया गया?

      Ans. ट्रांजिस्टर (Transistor)

      Q. चौथी पीढ़ी के कंप्यूटर किस पर आधारित है?

      Ans. चौथी पीढ़ी के कंप्यूटर माइक्रो प्रोसेसर (Micro Processor) पर आधारित है।

      Q. Fifth generation computer में किस पर जोर दिया गया है?

      Ans. आर्टीफीशियल इंटेलीजेंस (Artificial Intelligence)


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       Email ki search history kaise hataye | How to delete search history from gmail app

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      हेलो दोस्तों आज की यह पोस्ट Email ki search history kaise hataye के बारे में है। जैसा कि हम सभी  अपने मोबाइल पर Gmail app का ज़रूर इस्तेमाल करते हैं। और मोबाइल पर कई प्रकार के Emails आते रहते हैं जिस कारण हम किसी खास ईमेल को ढूढ़ने के लिए उसका नाम टाइप कर सर्च करते हैं। और फिर इस प्रकार से यह सर्च हिस्ट्री काफी लंम्बी हो जाती है। जिसे हम जानना चाहते हैं Email ki search history kaise hataye? तो चलिए जानते हैं कैसे ईमेल की सर्च हिस्ट्री हटाते हैं?


      Email ki search history kaise hataye - ईमेल की सर्च हिस्ट्री कैसे हटाए?

      Email ki search history kaise hataye - ईमेल की सर्च हिस्ट्री कैसे हटाए?
       Email ki search history kaise hataye


      यदि आप Email ki search history delete करना चाहते हैं तो -


      Email ki search history kaise hataye | How to delete search history from gmail app
       Email ki search history kaise hataye


      1. सबसे पहले आपको अपने मोबाइल पर जीमेल एप को ओपेन कर लेना है।

      2. इसके बाद सबसे उपर लेफ्ट साइड में 3 लाइन पर क्लिक करिए।

      3. अब आपको नीचे स्क्रोल करके Settings ऑप्शन पर चले जाना है।

      4. जब Setting क्लिक करेगे तो आपके सामने फिर एक General settings का ऑप्शन मिलेगा उस पर क्लिक कर दीजिए।

      5. इसके बाद General settings में आपको राइट साइड में 3 डॉट पर क्लिक करना है।

      6. अब यहाँ पर आपको Email ki search history clear करने का ऑप्शन मिल जाएगा। उस पर क्लिक कर दीजिए। एक पॉपअप शो होगा जिसमें से आपको Clear पर क्लिक कर देना है।


      इस प्रकार से आप अपने Gmail app की सर्च इतिहास को डिलीट कर सकते हैं।


      How to delete search history from gmail app

      Open Gmail app > Tap three line > Settings > General settings > Three Dots > Clear search history > Tap Clear.


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